पद परिचय, परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Pad Parichay in Hindi

इस लेख में हम आपको पद परिचय की परिभाषा (Pad Parichay ki paribhasa) (Pad Parichay kise kahate hain), पद परिचय के भेद (Pad Parichay ke bhed) और Pad Parichay के उदाहरण के बारे में बताने वाले हैं। इस Article में पद परिचय के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इसको ध्यान से पढे।

पद परिचय, परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Pad Parichay in Hindi

पद परिचय कैसे करते हैं?

‘शब्द’ भाषा की अर्थवान स्वतंत्र इकाई है, तो वाक्य में प्रयुक्त शब्द ‘पद’ है। वाक्य में आए ‘पदों’ का विस्तृत व्याकरणिक परिचय प्रस्तुत करना ही पद-परिचय कहलाता है।

पद-परिचय देने के लिए शब्दों के भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक आदि का भी परिचय देना होता है। पद-परिचय में निम्नलिखित बातें बताई जानी चाहिए :

1. संज्ञा — संज्ञा के तीनों भेद (जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक), लिंग, वचन, कारक तथा क्रिया के साथ उसका संबंध (यदि हो तो)

उदाहरण 1 – लंका में राम ने बाणों से रावण को मारा।
इस वाक्य में ‘लंका’, ‘राम’, ‘बाणो’, और ‘रावण’ चार संज्ञा पद हैं।
इन संज्ञा पदों का पद परिचय इस प्रकार होगा:
लंका : संज्ञा, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
राम : संज्ञा, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
बाणों : संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, करण कारक।
रावण : संज्ञा, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक।

2. सर्वनाम — सर्वनाम के भेद (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक), पुरुष, लिंग, वचन, कारक तथा क्रिया के साथ उसका संबंध।

उदाहरण- जिसे आप लोगों ने बुलाया है, उसे अपने घर जाने दीजिए।
इस वाक्य में ‘जिसे’, ‘आप लोगों ने’, ‘उसे’ और ‘अपने’ पद सर्वनाम हैं। इसका पद परिचय इस प्रकार होगा।
जिसे : अन्य पुरुष, सर्वनाम, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक।
आप लोगों ने : पुरुषवाचक सर्वनाम, मध्यम पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक।
उसे : अन्य पुरुष, सर्वनाम, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक।
अपने : निजवाचक सर्वनाम, मध्यम पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, संबंध कारक।

3. विशेषण — विशेषण के भेद (गुणवाचक, परिमाणवाचक, संख्यावाचक, सार्वनामिक), लिंग, वचन, विशेष्य (जिसकी विशेषता बता रहा है)।

उदाहरण 1- ये तीन किताबें बहुत बहुमूल्य हैं।
उपर्युक्त वाक्य में ‘तीन’ ,’बहुत’ और ‘बहुमूल्य’ विशेषण हैं। इन दोनों विशेषणों का पद परिचय निम्नलिखित है-
तीन : संख्यावाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, इस विशेषण का विशेष्य ‘किताब’ हैं।
बहुत : संख्यावाचक,स्त्रीलिंग, बहुवचन।
बहुमूल्य : गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन।
उदाहरण 2 – सज्जन मनुष्य बहुत बातें बनाते है।
इस वाक्य में ‘सज्जन’ और ‘बहुत’ विशेषण पद हैं।

4. क्रिया — भेद (अकर्मक, सकर्मक, प्रेरणार्थक, समस्त, संयुक्त, नामिक, पूर्वकालिक, मिश्र आदि), लिंग, वचन, पुरुष, धातु, काल, वाच्य, प्रयोग, कर्ता व कर्म का संकेत।

उदाहरण 1- राम ने रावण को मारा।
मारा – क्रिया, सकर्मक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्तृवाच्य, भूतकाल। ‘मारा’ क्रिया का कर्ता राम तथा कर्म रावण।

5. क्रियाविशेषण — भेद (रीतिवाचक, स्थानवाचक, कालवाचक, परिमाणवाचक) तथा उस क्रिया का उल्लेख जिसकी विशेषता बता रहा है।

उदाहरण1- लड़की उछल कूद कर रही हैं।
इस वाक्य में ‘उछल कूद’ क्रियाविशेषण है।
इस क्रियाविशेषण का Pad parichay निम्न तरीके से होगा-
उछल कूद  : रीतिवाचक क्रियाविशेषण है जबकि  ‘कर रही है’ क्रिया की विशेषता बतलाता है।

6. समुच्चयबोधक — भेद (समानाधिकरण, व्यधिकरण) जिन शब्दों, पदों, वाक्यों को मिला रहा है उनका उल्लेख ।

उदाहरण – दिल्ली अथवा कोटा में पढ़ना ठीक है।

इस वाक्य में ‘अथवा’ समुच्चयबोधक शब्द है। इसका पद परिचय इस प्रकार होगा : अथवा : विभाजक समुच्चयबोधक अव्यय है तथा ‘कोटा’ और दिल्ली के मध्य विभाजक संबंध।

7. संबंधबोधक — भेद, जिसमें संबंध है उन संज्ञा/सर्वनामों का निर्देश।

उदाहरण 1- कुर्सी के नीचे बिल्ली बैठी है।
उपर्युक्त वाक्य में ‘के नीचे’ संबंधबोधक है। ‘कुरसी’ और ‘बिल्ली’ इसके संबंधी शब्द हैं।

8. विस्मयादिबोधक — भेद तथा कौन-सा भाव प्रकट कर रहा है।

उदाहरण 1-  वे प्रतिदिन जाते हैं।
वाक्य में ‘प्रतिदिन’ अव्यय है।
इसका पद परिचय इस तरह होगा-

प्रतिदिन : कालवाचक अव्यय, यहां ‘जाना’ क्रिया के काल बताता  है इसलिए जाना क्रिया का विशेषण है।
उदाहरण 2 – वाह ! क्या अच्छी पुस्तक लाये।
वाह ! : विस्मयादिबोधक शब्द है जो आनंद को प्रदर्शित कर रहा है।

पद-परिचय से पूर्व सभी पदों का संक्षिप्त परिचय अपेक्षित है।

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