मोबाइल फोन पर निबंध | Mobile Phone Essay in Hindi

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मोबाइल फोन पर निबंध | Mobile Phone Essay in Hindi

अद्भुत वरदान

कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। जब-जब मनुष्य को आवश्यकता महसूस हुई तब-तब आविष्कार हुए हैं । जब मनुष्य आदिम था अर्थात् अपने विकास के प्रथम चरण में था, उसने पत्थर को रगड़कर आग का आविष्कार किया। पत्थरों के औजार और तन सजाने तथा सरदी-गरमी से बचने के लिए उसने रंग-बिरंगे परिधानों का आविष्कार किया। इस प्रकार नित नए आविष्कार होते रहे, युग बदलते रहे। वास्तव में मनुष्य को जब जिस वस्तु की आवश्यकता पड़ी उसने उसे पाने के असंभव प्रयास किए और आज भी यह प्रयास निरंतर जारी हैं। कंप्यूटर, टी०वी०, रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फ़ोन इत्यादि भौतिक वस्तुएँ इसके परिचायक हैं । आज से कुछ वर्ष पहले क्या हमने कभी कल्पना भी की थी कि हम फ़ोन हाथ में लेकर घूमेंगे? हमारी टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि पलक झपकते ही विज्ञान का एक नया तथा अद्भुत वरदान हमारे सामने होता है।

मोबाइल फ़ोन भी ऐसा ही एक वरदान है, जो बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ है। आज हर व्यक्ति के हाथ में इसे देखा जा सकता है। हो भी क्यों न, यह है ही इतना लाभदायक। आज मोबाइल एक मित्र की भाँति हमारे साथ रहता है और कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होने देता। हर व्यक्ति इससे जुड़ा है।

सुविधाएँ

मोबाइल फ़ोन के कई लाभ हैं; जैसे-कभी गाड़ी खराब हो गई, कहीं पर देर हो गई या कोई ऐसी घटना हो गई जिसकी आप किसी को सूचना देना चाहते हैं या सहायता लेना चाहते हैं, तो झट से यह मोबाइल फ़ोन आपकी समस्या को हल कर देगा। केवल बात करने की ही नहीं, यह फ़ोन अनेक अन्य सुविधाएँ भी देता है। तरह-तरह के खेल, कैलकुलेटर, फ़ोन बुक की सुविधा, समाचार, चुटकुले, चटपटी बातें, ये तो आम सुविधाएँ हैं। एस०एम०एस०’ सबसे अधिक सस्ता साधन है, देश-विदेश कहीं भी अपना संदेश पहुँचाइए। कई लोग मिलकर बात कर सकते हैं और आप यदि कहीं काम में लगे हैं तो आपके लिए संदेश आपका मोबाइल स्वयं ले लेगा।

एक नई और महत्त्वपूर्ण सुविधा जो मोबाइल ने लोगों को दी है, वह है एस०एम०एस० के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेना और अब तो प्रतियोगियों के भाग्य का फैसला भी जनता के हाथ में है। जितना गुड़ डालिए, उतना मीठा होगा-चाहिए तो कैमरा लीजिए, ई-मेल की सुविधा प्राप्त कीजिए और भी न जाने क्या-क्या।

हानियाँ

प्रश्न यह उठता है कि अगर यह इतना लाभकारी है, तो फिर विद्यालय में अध्यापक इसके प्रयोग पर नाराज़ क्यों होते हैं ? इस पर रोक क्यों लगाते हैं ? यहाँ दोष मोबाइल का नहीं, इसका प्रयोग करनेवाले विद्यार्थियों का है, जो बिना सोचे-समझे इसका दुरुपयोग करने लगते हैं और तब लाभ देने के स्थान पर हानिकारक हो जाता है।

मोबाइल फ़ोन का सबसे बड़ा दोष तो यह है कि यह समय-असमय यहाँ-वहाँ बजता ही रहता है। लोग सुरक्षा और शिष्टाचार भूल जाते हैं। गाड़ी चलाते समय फ़ोन पर बात करना असुरक्षित ही नहीं, कानूनन अपराध भी है।

निष्कर्ष

हर चीज एक सीमा में हो तो अच्छा है क्योंकि तभी उसका लाभ और महत्त्व समझ में आता है। किसी का भी दुरुपयोग विनाश के गर्त में जाने का सरल मार्ग होता है। अगर मोबाइल फोन की सुविधा मिली है तो हमें उसका सदुपयोग करना चाहिए। यदि हम इसका उपयोग भली-भाँति सबके हित में कर सकें तो यह अन्य आविष्कारों की तरह हमारे लिए उपयोगी सिद्ध होगा अन्यथा इस वरदान को अभिशाप में बदलते देर नहीं लगेगी।

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