हमारा देश भारत पर निबंध | Essay on Our Country in Hindi

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हमारा देश भारत पर निबंध | Essay on Our Country in Hindi

महान उर्दू कवि इकबाल ने ठीक ही कहा है :

“यूनानो मिस्त्र रूमां सब मिट गए जहां से, बाकी मगर है अब तक नामो-निशां हमारा।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमा हमारा।”

इकबाल की ये पंक्तियाँ भारत की संस्कृति एवं सभ्यता की भव्यता के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। वैसे तो सभी को अपनी मातृभूमि पर गर्व होता है, पर भारत भूमि तो स्वर्ग से भी महान है। जो इस धरा शिरोमणि भूमि पर जन्मा है वह अत्यंत भाग्यवान है। उत्तर में हिमालय की हिममंडित गगनचुंबी चोटियाँ हैं, जिन पर श्वेत बर्फ चाँदी के समान चमकती है; तीन ओर से समुद्र जिसके चरण पखारता है; गंगा-यमुना जैसी नदियाँ जिसके हृदय का कंठहार हैं तथा जहाँ सूर्य की किरणें केसर के फूलों की तरह शोभा बरसाती हैं-ऐसा देश है ‘भारत’।

भारत विश्व-सभ्यता का जनक है। संसार के अन्य देश जब अशिक्षित तथा नग्नावस्था में थे, तब भी यह उन्नति के चरमोत्कर्ष पर था। भारत ने ही मानव को सभ्यता का पहला पाठ पढ़ाया। विश्व की प्राचीनतम पुस्तक ‘वेद’ तथा विश्व की प्राचीनतम भाषा ‘संस्कृत’ भी इसी देश की देन है। उपनिषद, पुराण, दर्शन, गीता, रामायण जैसे महान एवं पवित्र ग्रंथों की रचना इसी देश में हुई। इसी धरा ने अध्यात्म का पाठ समूची मानवता को पढ़ाया तथा ज्ञान, भक्ति, कर्म की त्रिवेणी प्रवाहित की।

भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का संगम-स्थल है। केवल इसी देश में विभिन्न संस्कृति को समान रूप से फलने-फूलने तथा पल्लवित होने का अवसर प्राप्त हुआ। इस देश की संस्कृति में विभिन्न संस्कृतियों की धाराएँ मिली तथा वे सभी एक-प्राण हो गईं। अनेक धर्मों, मतों, संप्रदायों तथा वादों को जन्म देने वाले हमारे देश भारत ने विभिन्न संस्कृतियों को आत्मसात कर लिया है। भारत की प्राचीन वास्तुकला आज के वैज्ञानिकों को विस्मय में डाल देती है। भारतीय कला और कारीगरी द्वारा निर्मित वस्तुएँ अनेक देशों में जाती थीं। इसी समृद्धि के कारण यह देश ‘सोने की चिड़िया कहलाता था तथा सभी के आकर्षण का केंद्र था। इसी आकर्षण के कारण अनेक आक्रमणकारी यहाँ आए।

हमारे देश भारत में अनेक मंत्रद्रष्टा, ज्ञानी, ऋषि-महात्माओं एवं विद्वानों ने जन्म लिया। राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, नानक, कबीर, विवेकानंद, गांधी, अरविंद जैसे महामानवों ने इसी धरा पर जन्म लेकर इसका मान बढ़ाया। इसी धरती पर शिवाजी, राणा प्रताप जैसे वीर, हरिश्चंद्र जैसे सत्यवादी, अर्जुन जैसे धनुर्धर; कालिदास, वाल्मीकि, तुलसीदास, सूरदास तथा रवींद्रनाथ टैगोर जैसे अनेक कवियों ने जन्म लिया। इसी पुण्य भूमि पर आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, जगदीश चंद्र बसु, चंद्रशेखर वेंकटरमन तथा होमी भाभा जैसे महान वैज्ञानिकों ने जन्म लिया।

भौतिकवादी जगत् को ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः’ का आदर्श भारत ने ही दिया। हमारे देश ने ही संसार को अपरिग्रह का संदेश दिया। इसी धरा ने समूची मानवता को ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया’ का पावन मार्ग दिखाया। सत्य, अहिंसा, अस्तेय जैसे मानवीय गुणों की सृष्टि भी इसी धरा पर हुई।

सचमुच हमारा देश भारत बहुत सुंदर है। यहाँ भाँति भाँति की भाषा-भाषाई, संप्रदाय के लोग रहते हैं। हम सबमें वर्ण, लिंग, रंग इत्यादि का भेद है परंतु हमारा मन पूरी तरह से भारतीय है। यहाँ का प्रत्येक व्यक्ति सर्वप्रथम एक भारतीय है, उसके बाद उसका अस्तित्व दूसरा है। हमारे देश को सदियों तक दासता का अभिशाप सहना पड़ा, परंतु आज अपने औद्योगिक विकास, परमाणु विज्ञान तथा अंतरिक्ष अनुसंधान, चिकित्सा विज्ञान एवं कृषि-क्षेत्र की महान उपलब्धियों के कारण इसकी गिनती विश्व के प्रमुख देशों में की जाती है।

भारत देश महापुरुषों तथा मनीषियों की तपोभूमि है। मैं हर बार इस पावन वसुधा में जन्म लेना चाहूँगा। मुझे भारतीय होने पर गर्व की अनुभूति होती है क्योंकि मुझे ऐसी महान एवं पुण्य-भूमि पर जन्म लेने का सौभाग्य मिला।

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