भारत के गाँव पर निबंध | Essay On Indian Village In Hindi

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भारत के गाँव पर निबंध | Essay On Indian Village In Hindi

भारत की आत्मा गाँवों में निवास करती है — गांधी जी

“अहा ग्राम्य जीवन भी क्या है, क्यों न इसे सबका जी चाहे।
थोड़े में निर्वाह यहाँ है, ऐसी सुविधा और कहाँ है ?”

लहलहाते हुए खेत, खुला आसमान, स्वच्छ वातावरण, नंग-धडंग घूमते बच्चों की किलकारियाँ, सीधे-सादे कर्मठ किसान, भाईचारा, सर्वधर्म समभाव और एकता का प्रदर्शन । गाँवों में शुद्ध वायु तथा शुद्ध आहार के सेवन से वहाँ के निवासी स्वस्थ, परिश्रमी और शक्तिशाली होते हैं। प्रदूषण का वहाँ पूर्णतः अभाव होता है। आज भी वहाँ सादगी, भाई-चारे, सर्वधर्म समभाव तथा एकता के दर्शन होते हैं। प्रकृति के सुरम्य वातावरण में गाँववासी अत्यंत हृष्ट-पुष्ट तथा कर्मठ होते हैं।

गांधी जी ने कहा था-“भारत की आत्मा गाँवों में निवास करती है।” किंतु हमारे दृश्यपटल पर उभरने वाला यह चित्र क्या आज भी वास्तविकता में ऐसा ही है?

आज गाँवों में रूढ़ियों तथा अंधविश्वासों का बोलबाला है। जाति-प्रथा के कारण प्राय: लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं। भारत के गाँवों में कृषि करने के वही पुराने तरीके अपनाए जाते हैं, जिनके कारण उपज तो कम पैदा होती ही है, समय भी अधिक बरबाद होता है। गाँवों के लोग परिवार नियोजन जैसी राष्ट्रीय आवश्यकता पर ध्यान नहीं देते और जनसंख्या की वृद्धि पर रोक नहीं लगाते । यहाँ पर शिक्षा का सर्वथा अभाव है। इसलिए वे शादी-विवाह, मुंडन, नामकरण, मृत्युभोज आदि के अवसर पर अंधाधुंध पैसा बहाते हैं और वह भी कर्ज लेकर। इसीलिए किसी ने ठीक कहा है — “भारत का किसान ऋण में ही पैदा होता है, ऋण में जीवित रहता है और ऋण में ही मर जाता है।”

स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भारत के गाँवों की दशा बहुत ही दयनीय थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया तथा पंचवर्षीय योजनाओं में ग्राम विकास की अनेक योजनाएँ क्रियान्वित की गईं। गाँवों में सड़कें बनाई गईं, प्रकाश की व्यवस्था की गई, पीने का पानी उपलब्ध कराया गया, पढ़ाई के लिए स्कूल खोले गए, कृषि विकास की अनेक योजनाएं लागू की गईं, चिकित्सा की सुविधाएँ प्रदान की गईं। उन्हें परिवार नियोजन की ओर भी आकृष्ट किया जा रहा है । ऋण देने के लिए सहकारी बैंक खोले गए हैं। उनकी फसल को बनिए से बचाने के लिए सरकार उचित दाम पर खरीदती है।

भारत एक विशाल देश है। इसमें किसी कार्यक्रम की सफलता को थोड़े समय में नहीं आंका जा सकता। धीरे-धीरे गाँवों में सुधार हो रहा है। पहले की अपेक्षा आज के ग्रामवासी अधिक शिक्षित हैं। वह दिन दूर नहीं जब भारत के गाँव भी शहरों की भाँति विकसित तथा सुख-सुविधाओं से संपन्न होंगे।

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